झारखंड में पेसा कानून पर सियासी वार-पलटवार

रांची: झारखंड में पेसा कानून को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच वार-पलटवार का दौर जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा अब आदिवासी समाज को गुमराह करने और उनका राजनीतिक लाभ उठाने में लगी हुई है।

राकेश सिन्हा ने कहा कि रघुवर दास 2014 से 2019 की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में पेसा कानून पर निर्णय क्यों नहीं लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा को आदिवासी समाज की चिंता थी, तो सीएनटी/एसपीटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव क्यों नहीं पारित किया गया। सिन्हा ने यह भी कहा कि भाजपा के नौ सांसद होने के बावजूद सरना धर्म कोड केंद्र सरकार से पास नहीं कराया गया।

 

राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि भाजपा का उद्देश्य आदिवासी स्वशासन नहीं है, बल्कि भ्रम फैलाकर सत्ता प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले आदिवासियों को ईसाई बताकर उनकी नागरिकता और अधिकारों पर सवाल उठाती थी, अब पेसा कानून का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

 

राकेश सिन्हा ने कहा कि महागठबंधन की सरकार पेसा नियमावली को लेकर गंभीर है और प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा आदिवासी अस्मिता, भाषा, संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और यूपीए की सरकार में वन अधिकार कानून लाकर इसे मजबूती प्रदान की। जबकि मोदी सरकार ने वन अधिकार कानून को ताक पर रखकर आदिवासियों की जमीन पूंजीपति मित्रों को हवाले कर दी।

 

पेसा कानून पर बयानबाजी

ज्ञात हो इससे पहले आज पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पेसा कानून के बहाने हेमंत सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि हेमंत सरकार पेसा कानून लागू करने में देरी कर रही है और निकाय चुनाव टाल रही है। रघुवर दास ने आरोप लगाया था कि बालू और कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े सिंडिकेट पेसा कानून लागू होने के खिलाफ हैं ।

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