सरना झंडा स्थापना को लेकर आदिवासी समाज के दो गुटों में विवाद, लालपुर बना रणक्षेत्र

रांची : झारखंड में एक बार फिर सरना झंडा का विवाद ने तूल पकड़ लिया हैँ. लालपुर स्थित डिस्टिलरी पुल के पास प्लॉट नंबर 1138 पर लगा सरना झंडा हटाने को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा हैँ।स्थानीय लोगो का आरोप है की JLKM नेत्री वा सामाजिक कार्यकर्त्ता निशा भगत और 3 अन्य महिला शनिवार को उस स्थान पर पहुंची जहां सरना झंडा लगा था और जबरदस्ती वहां से झंडा उखाड़ कर ले गई। जब शनिवार को निशा भगत वहां पहुंची थी तो स्थानीय महिलाओं से विवाद भी हुआ था।

बस्ती के लोगों का कहेना है कि उनलोगों ने वहां सरना झंडा जमीन को दलालो और बिल्डर से बचाने के लिए वहां गाड़ा था।

वही निशा भगत का कहेना है कि कि वहां के ईसाई लोगों ने सरना झंडा को गन्दगी में गाड़ कर झंडे का अपमान किया इसलिए हमने झंडा वहां से हटाया। दोनों तरफ से

विवाद बढ़ा तो रविवार को खिजरी विधायक राजेश कच्छप और केंद्रीय सरना सिमिति अध्यक्ष अजय तिर्की बस्ती पहुंचे उनलोगो ने आरोप लगया कि निशा भगत बिल्डर से पैसे लेकर उस जगह से झंडा उखाड़ा ताकि बिल्डरों का काम आसान हो जाये।

इसके बाद बस्ती के लोगों ने सोमवार को एल्बर्ट एक्का चौक पर निशा भगत तथा झंडा उखाड़ने वाली अन्य महिलाओं का पुतला दहन किया गया।

इसके बाद निशा भगत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरना झंडा का राजनीतिक और धार्मिक गलत इस्तेमाल हो रहा है. जो आदिवासी सरना समाज की पारंपरिक, आस्था, संस्कृति और पहचान पर सीधा हमला हो रहा है. साथ ही खुली चुनौती दी है कि सरना झंडा का उपयोग जमीन लूटने, गंदगी वाली स्थान, जैसे स्थानों पर नहीं स्थापित किए जायेंगे. क्योंकि ये सरना झंडा आदिवासियों के आस्था और पंरपरा का प्रतीक चिन्ह है.

आज गुरुवार को अजय तिर्की और स्थनीय लोगों जिस जगह से सरना झंडा हटाया गया वहां पुनः झंडा लगाने पहुँचे जिसके बाद वहां निशा भगत, लालपुर सरना सिमिति के सदस्य लोगो तथा सरना समाज के कई लोगो वहां पहुँचे जिसके बाद वहां दोनों पक्षो में बात विवाद शुरू हो गया और देखते ही देखते झड़प कि स्थिति बन गई। जिसके बाद मौके पर तैनात पुलिस बल तथा अधिकारीयों ने दोनों पक्षो को समझा-बुझा कर शांत करने कि कोशिश की. लेकिन दोनों पक्ष अपनी -अपनी बातो से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।

उसके बाद अनुमंडल दण्डाधिकारी की ओर से दोनों पक्षो को सम्मन दिया गया और 13 अगस्त को अनुमंडल दण्डाधिकारी के न्यायालय में अपना पक्ष रखने को कहा गया। जिसके बाद दोनों पक्ष शांत हुए और उस जगह से बिना झंडा लगाए लौट गए।

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