रांची, 29 नवंबर : बालिका शिक्षा भवन प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय, रांची के वार्षिक उत्सव में आज उत्साह और गरिमा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। शिक्षा, संस्कृति और सृजनात्मकता के संगम से सजे बालिका शिक्षा भवन प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय के इस ऐतिहासिक संस्थान ने अपने 91वें वर्ष में प्रवेश करते हुए एक भव्य समारोह का आयोजन किया, जिसने वहां उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रेरणा से भर दिया। इस प्रतिष्ठित विद्यालय की गौरवमयी यात्रा की जानकारी देते हुए सचिव डॉ. कमल कुमार बोस ने अपने कहा— अपने 90 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा में यह विद्यालय निरंतर सफलता को प्राप्त करता रहा है और अब यह शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है—यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने मनमोहक स्वागत-गान, भारत वंदना, हिंदी एवं बंगला गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने उपस्थित अतिथियों, दर्शकों एवं अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर बच्चों की आत्मविश्वास भरी प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों का भी समान महत्व है।
समारोह के मुख्य अतिथि रूप में डॉ. वासुदेव प्रसाद, संस्थापक प्राचार्य—राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर, धनबाद शामिल हुए, उन्हें विद्यालय की प्राचार्या, शिक्षक–शिक्षिकाओं एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को सॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।
इस दौरान डॉ. वासुदेव प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा—“यह विद्यालय केवल ज्ञान देने वाला केंद्र नहीं, बल्कि मानव मूल्यों, अनुशासन और संस्कृति का संवाहक है। यहाँ के विद्यार्थी जिस सौम्यता, आत्मविश्वास और कला से आज मंच पर उतरे, वह इस बात का प्रमाण है कि यह संस्थान झारखंड की शिक्षा परंपरा को नई दिशा दे रहा है। मेरी शुभकामनाएँ इस सशक्त शैक्षिक परिवार के साथ सदैव रहेंगी।”

विद्यालय प्रबंधन के अध्यक्ष प्रदीप विश्वास ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी मिलकर एक होनहार एवं शानदार नागरिक भारत देश को अपने प्रदान करेंगे।
गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. प्रो. पूनम निगम सहाय, पूर्व विभागाध्यक्ष—अंग्रेज़ी, रांची विश्वविद्यालय ने कहा कि बालक-बालिकाओं का यह विद्यालय जिस सामंजस्यपूर्ण वातावरण में शिक्षा दे रहा है, वह सामाजिक उत्थान का एक बड़ा माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में अभिव्यक्ति, साहस और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं।
गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. जितेंद्र सिंह, रजिस्ट्रार—झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी ने अपने वक्तव्य में कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह विद्यार्थियों को अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करे। उन्होंने विद्यालय की 91 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

समारोह में विद्यालय के सचिव डॉ. कमल कुमार बोस ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया, वही विद्यालय की हेडमिस्ट्रेस श्रीमती जयश्री मुखर्जी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उनके संबोधन में विद्यालय की वर्तमान उपलब्धियाँ, शैक्षिक प्रगति और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत वर्णन था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की वार्षिक पत्रिका “देयला” का लोकार्पण भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों की साहित्यिक एवं कलात्मक अभिव्यक्तियों का उत्तम संकलन प्रस्तुत है।
समारोह के अंत में प्राथमिक विभाग की एच.एम. श्रीमती सुधा मुखर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
अंत में विशिष्ट अतिथि डॉ. ओम प्रकाश, शिक्षक—राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, कांके, रांची ने अपने उद्बोधन में कहा—“यह विद्यालय शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का अद्भुत संगम है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ यह सिद्ध करती हैं कि यहाँ का शैक्षिक वातावरण न केवल प्रतिभा को निखारता है, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए तैयार करता है। ऐसे संस्थान झारखंड की शैक्षिक पहचान को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं।
आज का यह वार्षिक उत्सव विद्यालय की 91 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को और भी मजबूत करता है। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर उत्साह, गर्व और प्रेरणा से भरा रहा।
