पहाड़ी मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं पर बवाल: ऑडिट रिपोर्ट से उठे गंभीर सवाल, न्यास बोर्ड की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह

रांची : पहाड़ी मंदिर से जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंदिर विकास समिति ने बृहस्पतिवार  को प्रेस वार्ता कर हालिया ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया।

समिति ने बताया कि रिपोर्ट में लाखों रुपये के ऐसे ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, जिनके लिए न तो स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध हैं और न ही उनके उपयोग का कोई ठोस विवरण दिया गया है। ऑडिट में “Loans and Advances” के नाम पर दी गई राशियों में भी पारदर्शिता की कमी उजागर हुई है।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार निम्नलिखित प्रमुख ट्रांजैक्शन सामने आए हैं—

– Ashish Kumar — ₹1,00,000

– Neha Sahu — ₹1,80,000

– Rinku Devi — ₹1,50,000

– Akshya Kumar — ₹50,000

– Rakesh Sinha — ₹1,90,000

– Jharkhand Rajya Hindu Dharmik Nyas Prashad — ₹4,00,000

इनके अलावा अन्य कई लेन-देन है, जिनके समर्थन में कोई स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।समिति का कहना है कि ये सभी लेन-देन उस समय के हैं जब मंदिर का संचालन झारखंड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा गठित पूर्व समिति के हाथों में था। कुछ ट्रांजैक्शन पूर्व सचिव से जुड़े बताए जा रहे हैं, जो जांच का विषय है।

समिति ने कहा कि यदि न्यास बोर्ड पारदर्शिता एवं जवाबदेही की बात करता है, तो उसे सबसे पहले अपने द्वारा गठित समिति के कार्यकाल के दौरान हुए इन सभी वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए।

पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर आज अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हीं लोगों एवं समिति को पूर्व में न्यास बोर्ड द्वारा मान्यता भी दी गई थी। ऐसे में बिना निष्पक्ष जांच के एकतरफा कार्रवाई करना दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। समिति ने ये भी आरोप लगाया कि न्यास बोर्ड आस्था के केंद्र को राजनीती का मैदान बना रही है और एक पार्टी से जुड़े लोगों को समिति में शामिल किया जा रहा हैँ।

इस पूरे विवाद को लेकर मामला झारखंड उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। समिति ने न्यास बोर्ड की नई अधिसूचना को W.P.(C) No. 5123/2026 के तहत चुनौती दी है।

समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक यदि किसी भी पक्ष द्वारा जबरन मंदिर का प्रभार लेने अथवा नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया गया, तो समिति एवं श्रद्धालुओं द्वारा उसका लोकतांत्रिक एवं पुरजोर विरोध किया जाएगा।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *