पटना : बिहार की राजधानी पटना में नेपाली युवती के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई है. पीड़िता नौकरी की तलाश में सिलीगुड़ी होते हुए पटना जंक्शन पहुंची थी, जहां एक निजी बस चालक कार्तिकेय ने बातचीत के बहाने उसे अपने जाल में फंसा लिया. खुद को मददगार बताते हुए उसने युवती को नौकरी दिलाने का झांसा दिया और बस में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले गया.
पीड़िता का आरोप है कि बस चालक कार्तिकेय ने उसे पटना लाकर दो दिनों तक अज्ञात स्थानों पर बंधक बनाए रखा. इस दौरान उसने बार-बार दुष्कर्म किया और युवती के पास से ₹13,000 भारतीय रुपये व 2000 नेपाली रुपये भी लूट लिए. यह पूरी घटना मंगलवार सुबह 4 बजे से शुरू हुई थी, जब आरोपी ने काम के बहाने युवती को अपने साथ चलने के लिए कहा था.
घटना के बाद गुरुवार को गांधी मैदान के पास युवती बेसुध हालत में रोती हुई मिली. गोरखा रेजिमेंट के जवानों की नजर उस पर पड़ी, जिन्होंने बिहार गोरखा सेवा समिति के अध्यक्ष सूरज थापा को इसकी सूचना दी. थापा ने उसे अपने कौशल नगर स्थित घर पर शरण दी. रात में थापा की पत्नी से बातचीत के दौरान पीड़िता ने पूरी आपबीती सुनाई. शर्म के कारण वह पहले पुलिस से संपर्क नहीं कर सकी थी.अगले दिन थापा दंपति पीड़िता को लेकर हवाई अड्डा थाने पहुंचे, जहां आरोपी बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. सचिवालय एसडीपीओ डॉ. अनु कुमारी ने बताया कि घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम (एफएसएल) को बुलाया गया है. पीड़िता नेपाली भाषा बोलती है, जिससे संवाद में कठिनाई हो रही थी, इसलिए अनुवादक की मदद ली जा रही है.
पीड़िता ने बताया कि उसके परिवार में सौतेली मां और दो सौतेले भाई हैं. सौतेली मां उस पर लगातार कमाने का दबाव डालती थी. इसी कारण वह नेपाल से भागकर भारत आई. आर्थिक मजबूरी और भावनात्मक उपेक्षा ने उसे इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया.
नेपाल से भारत आने वाली युवतियां हो रही शोषण और तस्करी का शिकार
यह घटना अकेली नहीं है. नेपाल से भारत आने वाली युवतियां लगातार शोषण और तस्करी का शिकार हो रही हैं. पटना के अलावा सीतामढ़ी में भी हाल ही में 13 वर्षीय नेपाली बच्ची के साथ चाकू की नोंक पर दुष्कर्म हुआ था. वहीं पश्चिम बंगाल में 56 युवतियों को नौकरी के झांसे में पटना लाने का प्रयास हुआ था. उनके हाथों पर एक जैसी मुहर लगी थी, जो मानव तस्करी की आशंका को पुख्ता करता है.
