बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों में दबाव की राजनीति जारी है। एनडीए के प्रमुख सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी इसी काम में लगे हुए हैं। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था और जदयू को टारगेट कर कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिससे एनडीए को नुकसान भी हुआ था। हालांकि, इस बार लोजपा NDA गठबंधन के साथ है, और चिराग पासवान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह एनडीए की सामूहिक रणनीति के अनुसार ही चुनाव लड़ेंगे।
चूंकि, पिछले विधानसभा चुनाव में लोजपा एनडीए से बाहर थी, इसलिए इस बार उसके लिए नए सिरे से सीटों का आवंटन किया जाएगा। ऐसे में लोजपा (रामविलास) के द्वारा दिए जा रहे बयानों को उसकी ज्यादा से ज्यादा सीटों की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, लोजपा इस बार 30 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन भाजपा और जदयू की ओर से उसे 20 से 25 सीटें देने की संभावना है। भाजपा और जदयू दोनों लगभग 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। शेष सीटें अन्य घटक दलों जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो — को दी जा सकती हैं।
चिराग पासवान के खुद के चुनाव लड़ने और सीटों पर लोजपा (रामविलास) के लड़ने के बयान पर भाजपा ने साफ किया है कि एनडीए की सभी पार्टी सभी सीटों पर लड़ेगी। गठबंधन का जो भी उम्मीदवार होगा वह हर दल का होगा, ऐसे में चिराग के बयान में कुछ भी गलत नहीं है। जहां तक चिराग के खुद के चुनाव लड़ने की बात है, तो यह उनकी पार्टी तय करेगी कि कौन चुनाव लड़ेगा कौन नहीं। गौरतलब है कि गठबंधन में चिराग की मजबूती के पीछे भाजपा का पूरा समर्थन है। चिराग खुद भी कई बार खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बता चुके हैं।
भाजपा सूत्रों का कहना है, चिराग गठबंधन में भाजपा के हिसाब से ही चलेंगे। उनका मौजूदा दबाब सीटों को लेकर है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में वह साथ में नहीं थे, इसलिए इस बार अपनी पार्टी के लिए ज्यादा सीटें चाहते हैं और लोकसभा चुनावों के फॉर्मूले को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसमें भाजपा व जदयू को तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन लोजपा (रामविलास) को ज्यादा लाभ होगा पर इससे जीतनराम मांझी की हम व उपेंद्र कुशवाह की रालोमो की दिक्कतें बढ़ेंगी। हालांकि, भाजपा का मानना है कि यह ज्यादा बड़ी समस्या नहीं है और जल्द ही इस पर सहमति बना ली जाएगी।
